Meri Soch
Monday, December 9, 2019
उड़ जाना है...
बनकर पँछी कही दूर उड़ जाऊँ...
सोचती हूँ, फिर देर रात तक ना आऊँ ।।
अपनी दुनिया वादियो मे जा बसाऊ...
एक खुबसूरत सी दुनिया पहाडों में बनाऊ।।
थक चुकी हूँ इस दिखावी दुनिया से...
मुझे उड़ जाना है यहा से...
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तेरी आदत...
मेरे जज्बातों से खेलना तो पुरानी आदत है तेरी... इसमें नया क्या ? ख़ेर मुझे आदत है तेरी इस आदत कि भी😐
क्योंकि कल फिर उसे आना है...
वो डूब गया क्योंकि ,कल फिर उसे आना हैं। वो डूब गया क्योंकि , कल फिर उसे संसार को जगमगाना हैं। वो डूब गया क्योंकि , कल फिर उसे चिड़िया ...
यादें /Memory
अक्सर मेरे मस्तिष्क में यादों का समंदर बहता है , जिसकी लहरे मुझे अक्सर विचलित कर जाती है ।। यादें एक ...